Tuesday, 4 December 2018

नेशनल हेराल्ड केस क्या है

नेशनल हेराल्ड अखबार जवाहरलाल नेहरू ने 1938 में शुरू की थी। उस समय यह कांग्रेस का मुख्यपत्र भी माना जाता था। इस अखबार का मालिकाना हक एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड नामक कंपनी के पास था यह कंपनी दो और अखबार छापा करती थी। हिंदी में 'नवजीवन' और उर्दू में 'कौमी आवाज' के नाम से  अखबार चाहती थी।
आजादी के बाद 1956 में एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड कंपनी को अव्यवसायिक कंपनी के रूप में स्थापित किया गया और कंपनी एक्ट की धारा 25 के तहत कर मुक्त कर दिया गया।
26 फरवरी 2011 को कांग्रेस ने इस कंपनी के 90 करोड़  रूपये  की देनदारियों  को अपने जिम्मे ले लिया था, यानि कि कांग्रेस पार्टी ने इसे 90 करोड़ रूपये का उधार दिया।
इसके बाद ₹5 लाख से यंग इंडियन के नाम से एक कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया और राहुल की 38-38  फीसदी हिस्सेदारी है। शेष 24 फीसदी  हिस्सेदारी मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस के पास है।
इसके बाद एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड कम्पनी के 10-10 रूपये के 9 करोड़ शेयर यंग इंडियन कम्पनी को दिए गए जिसके बदले यंग इंडियन को कांग्रेस का उधार चुकाना था।
9 करोड़ शेयर प्राप्त करने से यंग इंडियन कम्पनी की हिस्सेदारी एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड मे 99 फीसदी हो गई। बाद मे कांग्रेस पार्टी ने एसोसिएटेड जर्नल कम्पनी का उधारी माफ कर दिया, इससे यंग इंडियन कम्पनी को एसोसिएटेड जर्नल कम्पनी का स्वामित्व मुफ्त मे मिल गया।
इस मामले मे भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रामणियम स्वामी ने आरोप लगाया है कि यह सब दिल्ली में बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित हेराल्ड हाउस की 1600 करोड़ रूपये की भवन पर कब्जा करने के लिए किया गया।
अदालत मे सुब्रामणियम स्वामी द्वारा  सोनिया गांधी, राहुल गांधी और ऑस्कर फर्नांडिस के खिलाफ याचिका दायर की थी,जिसपर अभी भी सुनवायी चल रही है।

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